रघुबर जी से बैर करो न2
बैर करो न बैर करो2
रघुबरजी से----2
सत योजन परमाण सिन्धु के सो कोई बान्ध सकै ना
ताही बान्ध उतरै रघुनन्दन2, संग भाल कपि सैना
समर कोई जीत सकै ना
रघुबरजी से बैर करो ना
बैर करो ना----2
रघु----
होली से लंका जलाये दियो है, भागे से जीव बचै ना
करि करि जतन वीर सब थाकै, पावक प्रबल बुझै ना
युक्ति कछु एक लहै ना
रघुवरजी----
तुम जीयो अहवात हमारो सत्य कहौं प्रिय बैना
किन्ही रार नहीं फरियैहें, ताही संग जाये मिलो ना
भागै तिहूँ लोक बचै ना
रघुबरजी से----2
मय-तनया बहु भाँति सिखायो निश्चर कान करै ना
तुलसीदास कहै मूध भयो रावण, फूट हिया की नैना
तासो कछु सूझि पड़ै ना
रघुबरजी से----2
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लाल लंगोट बनै अति सुन्दर सेन्दुर तेल लगाये
एक कर गदा दोसर धवलागिरि अवध उपर चलि आये
भरत्जी ने बाण चलाये
अंजनी-सुत हरी मन भाये2
हरि मन भाये, प्रभु मन भाये2
अंजनी--------2
लागत बाण गिरे धरणि पर राम राम गोहराये
अचरज भयऊ भरतजी के मन में2, को ऐसो दूत पठाये
जो राम राम गोहराये
अंजनी सुत--------
केकर सुत केकर तुहू नायक कौन पुरी से आये
कौन पुरुसवा के करत चाकरी, कौन सन्देशा लेके आये
भरतजी के देहु ना बताये
अंजनी सुत------
अंजनीपुत्र पवनसुत नामा, लंकपुरी से आये
रामचन्द्रजी के करत चाकरी2, लक्ष्मण शक्ति सताये
संजीवन आनान आये
अंजनी सुत -----
Friday, 28 March 2008
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